Monday, March 18, 2013


जन्म नक्षत्र फल
 अश्विनी नक्षत्रः- स्वरुपवान, सौभाग्यवान, चतुर, स्थुल देह वाला, महान, धनवान, और जन प्रिय होता है ।
 भरणी नक्षत्रः- निरोगी , सच्चा बोलनेवाला , अधिक पराक्रमि , दृढ व्रत ग्रहन करने वाला , मनोहर मुख वाला , और धन वाला होता है ।
 कृत्तिका नक्षत्रः- कृपण , पापी , भूखवाला , सदा पीडित , न करने जैसे कार्य करता है ।
 रोहिणी नक्षत्रः- धनवान , कृतज्ञी , मतिमान , राजा का आदर पात्र , सच्च बोलने वाला , स्वरुप वान होता है ।
 मृगशिर नक्षत्रः- चपळ , चतुर , धीरजवान , अहंकारी और दुसरो की ईर्षा करने वाला होता है
 आद्रा नक्षत्रः- कृतघ्नी, क्रोधी, पापी, शठ, और धन-धान्य से हीन होता है ।
पुनर्वसु नक्षत्रः- सौम्य स्वभावी, सुखी, भोगी, सौभाग्यवान, जनप्रीय और पुत्र-मित्रके समुह वाला होता है ।
पुष्य नक्षत्रः- देव एवं धर्म का भक्त, पुत्रवान, चतुर, शांतस्वभावी एवं सुखी होता है ।
आश्लेषा नक्षत्रः- अभक्ष्य पदार्थ का उपयोग करने वाला, कृतघ्नी, धूर्त, शठ और नीच कार्य करने वाला होता है ।
मघा नक्षत्रः- अनेक नोकरो वाला, धनवान, भोगी, पिता का भक्त, उद्यमी, सेना का अधिपति और राजसेवी होता है ।
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्रः- विद्वान, गौपालक, धनवान, गंभीर, स्त्रीयों को प्रीय, सुखी, पंडित और पूज्य होता है ।
उतरा फाल्गुनी नक्षत्रः- इन्द्रियो को वश करने वाला, शूरवीर, मृदुवाणी बोलने वाला, धनुर्विद्या में निपुण योद्धा और जनप्रीय होता है ।
हस्त नक्षत्रः- असत्य वचनी, दयाहीन, शराबी, बिना भाइ वाला, चोर एनं परस्त्रीगामी होता है।
चित्रा नक्षत्रः- पुत्रवान, पत्नीवान, संतोषी, धन-धान्य वाला, देव तथा ब्राह्मणो का भक्त होता है ।
स्वाती नक्षत्रः- होंशियार, धर्मनिष्ट, कृपण, जनप्रीय, अच्छे चरित्र वाळा और देव भक्त होता है  
विशाखा नक्षत्रः- बहुत लोभी, अभिमानी, दयाहिन, जघडालु और वेश्यागामि होता है ।
अनुराधा नक्षत्रः- प्रवास प्रेमी, अपने भाइयों के कार्य करने में उत्साही, तथा दयालु होता है ।
ज्येष्ठा नक्षत्रः- ज्यादा मित्र वाले, प्रधान, कवि, तपस्या करने वाला, चतुर, धर्मनिष्ट तथा शुद्रो के द्वारा पूजाने वाला होता है ।
मूल नक्षत्रः- धन और वाहन वाला, हिंसक बलवान, स्थिर विचारवाला, शत्रुनाशक ओर दिखनेमें अच्छा होता है ।
                                                         
पूर्वाषाढा नक्षत्रः- उपकार द्रष्टी वाला, भाग्यवान, जनप्रिय, और सर्व प्रकारके मर्म को जानने वाला ज्ञाता होता है ।
उत्तराषाढाः- ज्यादा मित्र वाला, मोटा शरीरवाला, विनयवान सुखी पराक्रमी और विजय प्राप्त करने वाला होता है ।
अभिजित नक्षत्रः- उत्तम कान्ति वाला, सज्जनो का संग करने वाला, उत्तम कीर्ति वाला, स्वरुपवान, देवताओं और ब्राह्मणो की भक्ति करने वाला, यथार्थ वचन बोलने वाला और अपने कुळ में प्रधान होता है ।
श्रवण नक्षत्रः- कृतज्ञी, भाग्यवान, दानी, गुणवान, धनवान, और ज्यादा संतानवाला होता है ।
धनिष्ठा नक्षत्रः- संगीत विद्या का प्रेमी, भाइयो से मान प्राप्त करने वाला, सोने और झवेरात के अलंकार धारण करने वाला, सो आदमीओ का स्वामी होता है ।
शतभिषा नक्षत्रः- कृपण, धनवान, पर स्त्री सेवी, विदेशमें कामी होता है ।
पूर्वा भाद्रपदः- वक्तृत्व शक्ति वाला, सुखी परिवार वाला, ज्यादा सोनेवाला, और जीवन को फोगटमें गुमाने वाला होता है ।
उत्तरा भाद्रपदः- गोरे रंग का, सात्विक गुण वाले, धर्म के मर्म को जानने वाला, शत्रुओं का नाश करने वाला, देवताओ के समान पराक्रमी होता है ।
रेवतीः- संपूर्ण अंगो वाला, पवित्र, चतुर, साधु-जीवन वाला, शुरवीर और धन धान्य संपन्न होता है ।